पानी ......... पानी ....... रे (अविनाश वाचस्पति)
>> बुधवार, २२ अप्रैल २००९
आना एक शीतल पेय का
चाहे वो बहुराष्ट्रीय कंपनी का हो
और पानी की तरह आए
लेकिन जब
घर के नलके में
एक बूंद पानी न आए
यानी सारा घर
सिर्फ पानी के लिए तरस जाए
तब शीतल पेय का
कोई उपयोग नहीं।
ये तो आप भी मानेंगे
शीतल पेय को पीकर
प्यास नहीं बुझाई जा सकती
और न ही
नहाया या फिर
कपड़े ही धोया जा सकता है।
डूब मरने के लिए भी
तो पानी ही चाहिए
चुल्लू भर पानी
के स्थान पर
बोतल भर शीतल पेय
या चुल्लू भर शीतल पेय
क्या किसी काम आएगी
और बर्फ क्या
शीतल पेय की जमाई जाएगी
और न दूध में ही
शीतल पेय मिलाई जाएगी
और मलाई भी
कहां से आएगी ?
आप ही बतलाएं
होली कैसे मनाई जाएगी।
हां ! अगर आप चाहें
तो एक दूसरे को शीतल पेय पिलाकर
होली खेली जा सकती है
पर शर्त एक ही रहेगी
नहाना भी शीतल पेय से ही होगा।
कहीं लग गई आग अगर
तो कैसे बुझाएंगे
आग से बचने के लिए
कौन-सी मल्टीनेशनल कंपनी का
कोल्ड ड्रिंक लाएंगे।
शीतल पेय की जगह
पानी तो चल सकता है
शीतल पेय न हो
तो भी चलेगा
बिना पानी
एक भी क्षण कैसे कटेगा।

