ताकत आप हैं

अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

नौ दो ग्‍यारह लाईनां (अविनाश वाचस्‍पति)

>> गुरुवार, २ अप्रैल २००९

कवि कर्म
एक कला है
जेब काटना भी
कला है
लेकिन
वो कला कौन सी है
जिससे
सबका भला हो
वो कला
कविता करना
हो सकती है क्‍या ?...

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