ताकत आप हैं

अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

मजेभरी मुस्‍कान (अविनाश वाचस्‍पति)

>> मंगलवार, ३१ मार्च २००९

एक ही कारण
आनंद का सबब
अन्‍य के लिए
तकलीफ का सबक।

ऐसे कर्मों से
बचना श्रेयस्कर
माना गया है
पर हम बचना
चाहते हैं केवल
तकलीफ देकर
जाहिर होने से।

हम जाहिर होना
चाहते हैं
केवल तब
जब हमें
प्रशंसा मिले।

प्रशंसा को स्वीकार
न करने वाले
बड़े मुश्किल से
मिलते हैं जमाने में।

अनजाने में प्रशंसनीय कार्य करके
सुख लूटना भी एक कला है
अच्छा कार्य करके
भूलने वाले कम होते हैं।

कार्य किया - बतलाया
या जतलाया नहीं
अपना गुण गाया नहीं

या गवाया नहीं
किया नहीं बखान
तो कैसे सजेगी
मजेभरी मुस्‍कान।


चार करके
चौबीस गाएंगे
जो उन्होंने नहीं किया
उसे भी अपना बतलाएंगे
ऐसे नामी-गिरामी तो
बहुतेरे मिल जाएंगे।

चौबीस करें
एक न गाएं
कोई पूछे
झूठ बोल रहे हैं
पर अपनी अच्छाई का
भेद नहीं खोल रहे हैं
पूछने पर मुकर रहे हैं।

स्वतंत्रता को हासिल करने में
जिनका तनिक भी रहा न योगदान
वे बन बैठे हैं स्वतंत्रता सेनानी महान
खुद ही करते फिरते हैं अपना बखान
सत्ता पर होना चाहते हैं काबिज
और हो जाते हैं काबिज।

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