कानों में दीवार (अमिताभ बच्चन वाली नहीं) : (अविनाश वाचस्पति)
>> शुक्रवार, २७ मार्च २००९
आप फुसफुसाते हैं
सुना रहे हैं जिसे
उसके कान में
घुसे चले जाते हैं
कोई और न सुन ले
खिड़की या दरवाजे का
नहीं होता है डर।
डर होता है
दीवार का
कहीं सुन ना ले
सुना है न आपने
दीवारों के कान होते हैं।
दीवारों के कान होते हैं
तो मुंह भी होता होगा
और आंखें भी ............
इसका अर्थ हुआ
शरीर के सभी
अंग होते होंगे
दीवार में।
वरना दीवार सुन ले
सिर्फ कहे न किसी से
कोई खतरा नहीं
दीवार तो दीवार है
महिला नहीं जो
पचा नहीं पाएगी।
बात पचा सकती है
तो दीवार के पेट
होता होगा यार
पाचन संस्थान भी होगा
सभी क्रियाएं चलती होंगी
बात को पचाने की।
जब तक ठीक ठाक चलें
तब तक तो भला
हाजमा खराब होने पर ...........
जरूरत है अब
कानों में दीवार बनाने की
सामने वाला ओंठ हिलते देख रहा है
पर सुन नहीं रहा
कानों में दीवार का
कमाल है यार।

