ताकत आप हैं

अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

व्‍यंग्‍यश्री सम्‍मान से श्री प्रेम जनमेजय को सम्‍मानित किया जाएगा

>> रविवार, ८ फरवरी २००९




आप पधार रहे हैं
यही है आमंत्रण।
इंतजार रहेगा मुझे
आप सबका जी।

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