ताकत आप हैं

अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

बेतेल और बेतुकी पर तेल पर : इसके अनेक हैं रूप

>> शुक्रवार, ९ जनवरी २००९

चिकनाई से करते हैं परहेज
मक्‍खन से भी हैं डरते रोज
तला हुआ भी नहीं खाते हैं
गाड़ी को तो तेल पिलाते हैं।


क्‍यों नहीं सीएनजी किट लगवाते
गैस तो मिल रही है लाईनों में
तेल बेतेल हुआ है लाईनों में
प्रदूषण भी होता ऑफलाईन।


बेतेल हो रहा है देश ये
गाड़ी तेल मांग रही है
जहां मिल रहा है सही
लग रही है लाईन वहीं।


सत्‍यम ने सच का तेल निकाला है
वो तेल तो काम नहीं आने वाला है
सत्‍यम ने सच को भी निकाला है
झूठ का चहुं ओर ही बोलबाला है।


पप्‍पू की बढ़ती ख्‍याति से जल
राजू सच बोलने पड़ा निकल
कर दिया तहस नहस सच को
मुन्‍ना ने ऐसा नहीं किया था ।

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