ताकत आप हैं

अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

सोपानstep पत्रिका के नारदवाणी स्‍तंभ में पढि़ए कॉमनवेल्‍थ से पहले महाखेल

>> गुरुवार, १२ नवम्बर २००९

7 टिप्पणियाँ:

आशीष कुमार 'अंशु' November 12, 2009 2:31 PM  

badhai hooo

rajdev November 12, 2009 3:47 PM  

जन्मदिन वाला ब्लॉग आज खामोश क्यों है?
आज मनोज शर्मा कार्टूनिस्ट का जन्मदिन है
उनका ब्लॉग cartoontimes.blogspot है
mailID man_oj4u@yahoo.com

सुरेश यादव November 12, 2009 7:27 PM  

अविनाश जी आप खेल में से खेल और असमें भी खेल निकल ही लेते हैं.आप के व्यंग्य की नोंक पैनी है इसे बनाये रखें.बहुत बधाई.09818032913

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक November 12, 2009 7:51 PM  

बहुत-बहुत बधाई!

राज भाटिय़ा November 12, 2009 8:49 PM  

बहुत सुंदर जी

shama November 13, 2009 9:19 AM  

Jo likha hai wo sab sach hai..afsos ke ye sab jo karte karaate hain, wo hamarehee samaj kee upaj hain...hamarehee maa-bahnon ke jaye hain...ham is zimmedaaree se mukar nahee sakte..zaroorat hai, hame apne hee gibaan me jhankne kee..

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

http://kavitasbyshama.blogspot.com

http://baagwaanee-thelightbyalonelypath.blogspot.com

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी November 13, 2009 7:49 PM  

कॉमन वेल्थ खेल आयोजित करना कोई खेल नहीं है। इसमें बहुत पापड़ बेलने पड़ते है।

भारत वाले पापड़ बेलने का कुटीर उद्योग कबका छोड़ चुके हैं। अब तो विदेशी कम्पनियों का बनाया कुरकुरे, अंकल चिप्स, और अन्य चटपटे आइटम सबको लुभाने लगे हैं। बस पैसा फूँको तमाशा देखो का जमाना आ गया है। अतः आपको बहुत उम्मीद करनी ही नहीं चाहिए। :)

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