अमिताभ बच्चन हमारे घर आये
>> शनिवार, ११ अक्तूबर २००८

(बिग बी (ब्रदर) के 66वें जन्मदिन पर पुनर्प्रस्तुति)
एक दिन अमिताभ बच्चन हमारे घर आये
घर में अचानक उन्हें देख हम चकराये
अमिताभ भाई ने हमें गले से लगाया
हमको अंदर तक रोमांच हो आया
हम मन ही मन सोच रहे थे
इस रहस्य को टटोल रहे थे
तीर तुक्के उन पर फेंक रहे थे
निशाना न लगने पर झेंप रहे थे
लगता है अमिताभ भाई
करोड़पति तृतीय खेल रहे हैं
पहले फोन पर करते थे बात
अब घर घर डोल रहे हैं
कवि मित्र पवन चंदन प्रतिभागी होंगे
करोड़पति बनने की लाईन में डटे होंगे
डोर ए फ्रेन्ड्स का ऑप्शन चुना होगा
अरबपति बनने का ताना बाना बुना होगा
कौन बनेगा अरबपति ?
अमिताभ बोले नहीं वाचस्पति।
अब तो शाहरूख खेल खिला रहे हैं
चैक पर साईन करने से डर दिखा रहे हैं
करोड़पति बनने के लिए
लोग तो अब भी खूब किस्मत आजमा रहे हैं
शाहरूख गले मिल रहे हैं, जफ्फी पा रहे हैं
टोटके तो किंग खान के भी लोगों को खूब भा रहे हैं
मैंने कहा यह सारी दुनिया जानती है
टीवी ने आपके दीवानों को दीवाना और बनाया है
और तो और शाहरूख भी आपका दीवाना बनने से
नहीं बच पाया है तो बाकियों की क्या बिसात है
अभी तो न जाने किन मुद्दों पर चर्चा चलती
तभी श्रीमतीजी ने चाय के लिये आवाज लगाई
चाय के लिए किया मना और खींच ली पूरी रजाई
पर फिर न तो नींद आई और न ही अमिताभ भाई
बिग बी का साथ छूट गया और हमारा सपना टूट गया।

