अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

आत्‍महत्‍या करूं मैं क्‍या

>> Wednesday, August 20, 2008

आत्‍महत्‍या
करूं मैं क्‍या
कूद कूद कर
कहां पर कूदूं
कि उछल उछल
जाऊं
ऐसा करूं
छल
कि पकड़ में
न आऊं
सब बरबस
देखते रह जायें
और मैं
देख भी न पाऊं

12 टिप्पणियाँ:

अविनाश वाचस्पति August 20, 2008 6:44 AM  

मैं महंगाई हूं
आप प्रसन्‍न होंगे
गर मैं आत्‍महत्‍या करती हूं

पंगेबाज August 20, 2008 6:55 AM  

ऐसा काम ना करे . कम से कम १० सेकुलरो को साथ ले जाये तो आप शहीद बन जायेगे :)

अविनाश वाचस्पति August 20, 2008 7:05 AM  

पहला नाम आपका जोड़ दिया है
क्‍योंकि जो टांग अड़ाता है
उसका नाम पहला ही आता है
दूसरा आप सुझायें
तीसरा दूसरा सुझायेगा
और इसी तरह 10 तो कम हैं
तालिका 1000 तक पहुंच ही जाएगा
फिर शहीद घाट का प्‍लान भी बन सकेगा
सरकार न जाने कितने एकड़ दे देगी
दिल्‍ली के दिल में जगह।

राजीव तनेजा August 20, 2008 8:07 AM  

अपने साथ मुझे भी ले चलना बन्धु.....

Udan Tashtari August 20, 2008 8:57 AM  

शुभयात्रा!! आप सबको!

अविनाश वाचस्पति August 20, 2008 9:04 AM  

जल्‍दी जल्‍दी अपने मित्रों का नाम लिखायें
जब शहीद घाट की रजिस्‍ट्री होगी
तो उसमें सबका नाम दर्ज कराया जायेगा
अपने मित्रों को भी इस सुअवसर का लाभ
उठाने के लिए प्रेरित करें।

गरिमा August 20, 2008 11:09 AM  

अर्रे आत्महत्या ना महंगाई को ही करने दिजीये, खाले पीली मे हम अपनी जान क्यों गँवाये, और फिर महँगाई के मरने के बाद तो हमारे पास जीने के १०० बहाने मिल जायेंगे.. इसलिये मै प्रोत्साहित करती हूँ

महँगाई तुम आओ
लो रस्सी,फाँसी पर लटक जाओ
तुम्हारे पिछे मै भी आती हूँ
पर अभी नही सौ साल बाद
क्योंकि तुम्हारे बाद
हम हो जायेंगे आबाद :)

मेनका August 20, 2008 12:50 PM  

well said...
mahangaayi agar aatmhatya karle to phir baat hi kya hai..lekin koi ye to sujhaaye ki wo bhala kyon aatmhatya kare..koi wajah to ho. :)

सुशील कुमार छौक्कर August 21, 2008 7:26 AM  

आजकल तो हम भी यही सोच रहे थे।

अविनाश वाचस्पति August 21, 2008 8:26 AM  

उड़न तश्‍तरी पर होकर सवार
चलें सारे ब्‍लॉगर यार
पहले घूमेंगे
फिर झूमेंगे
उसके बाद भी दिल किया
तब ही कूदेंगे
पर आपस में है इतना प्‍यार
कोई किसी को धक्‍का नहीं देगा यार
उड़नतश्‍तरी पर होकर सवार
चलेंगे सारे (नहीं) सिर्फ इच्‍छुक
ब्‍लॉगर्स यार
कर ले कर ले कर ले
प्‍यार।

Mrs. Asha Joglekar August 25, 2008 11:39 AM  

Na na bandhu, fir wicharon ka thela kaun lagayega.

पवन *चंदन* September 1, 2008 6:57 AM  

जब मैंने पहली बार आत्‍महत्‍या की थी तो कोई कुछ नहीं बोला।

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