अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

हिम्मत है तो पैदल चल

>> Monday, December 17, 2007

नवभारत टाइम्स हिंदी दैनिक में 17 दिसम्बर 2007 को कांटे की बात स्तंभ में प्रकाशित व्यंग्य का लिंक

http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2626422.cms

क्लिकिए और व्यंग्य का आनंद लीजिए। अपनी राय बताने में कंजूसी न करें।

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