ताकत आप हैं

अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

फेसबु‍क विशेषज्ञ इसका विस्‍तार में अर्थ समझायें

>> मंगलवार, ९ फरवरी २०१०



यह रंग रंग क्‍या हैं
यदि आप उपर दिए गए रंगों
और इनके असर के बारे में
बतलायेंगे तो प्रसन्‍नता होगी
यह रैंकिंग क्‍या है
क्‍यों है
इसके क्‍या प्रभाव हैं
क्‍या लाभ हैं
जानने को मन बेताब है

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मिट्टी, पथरी, नीर और भगवान का सच (अविनाश वाचस्‍पति)

>> सोमवार, १ फरवरी २०१०


शरीर मिट्टी है
सब मानते हैं
इस मिट्टी से
पत्‍थर (पथरी)
डॉक्‍टर
निकालते हैं।

शरीर मिट्टी है
तो मिट्टी में
कंकर भी होंगे
होंगे पत्‍थर भी।

मिट्टी में
पत्‍थर
किसने भरे ?

मिट्टी को
किसने रचा ?

पत्‍थर को
किसने रचा ?

पत्‍थर पूजें हरि मिले
तो मैं पूजूं पहाड़
मिट्टी को पूजता है
सिर्फ किसान
मिट्टी की पूजा ही
है किसान की शान।

पत्‍थर को
कौन पूजता है
और
पत्‍थर पूजने से
क्‍या मिलता है ?

पत्‍थर हों
या हों कंकर
दुख के
बनते हैं एंकर।

इंसान खुद है
खुदा भी है
जिसने बनाया
है भगवान
मानो या न मानो
सच यही है जानो।

पत्‍थर को
पीर नहीं होती
पर नीर के आगे
पत्‍थर भी
बेबस होता है
नीर जब
गुजरता है
पत्‍थर पर से
तो पत्‍थर भी
गुजर जाता है।

किडनी के
भीतर के
पत्‍थर को भी
इसी प्रक्रिया से
गुजारा जाता है।

कई किडनियों पर
नीर का बस
नहीं चल पाता है
वहां पर दवाईयां
अथवा अंतत:
ऑपरेशन का
नंबर आता है।

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आइये दिल्‍ली की झांकी यहां पर देखें : गणतंत्र दिवस पर नहीं दिखाई जा रही है

>> मंगलवार, २६ जनवरी २०१०



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मैं लंदन नहीं गया : पर चित्र भी पहचानें (अविनाश वाचस्‍पति)

>> रविवार, २४ जनवरी २०१०


मेरे ऐसा कहते ही
मेरे सुर में मिलाने
सुर बहुत मिल गए
इतने सुर सुने हम
अंदर तक दहल गए।

मैं लंदन नहीं गया
परंतु कविता जी का
सान्निध्‍य पा गया
यह सब नेट का
कमाल है, मैं जो
बतला रहा हूं वो
कविता वाचक्‍नवी जी हैं
जिनसे मिलने के लिए
मैं लंदन जाने से बच गया
वैसे जाता भी कैसे ?
न पासपोर्ट है मेरे पास
रास्‍ते का पता नहीं है।

जब मिला कविता जी से
तो सान्निध्‍य मिला मुझे
रमणिका गुप्‍ता जी का भी
और भी बतलाऊंगा अभी
जिन जिन से मिला मैं
या वे मुझसे मिले पर
भीतर मन के खुशी के
अनेक नेक पुष्‍प खिले।

स्‍थान डिफेंस कालोनी रहा
पर डिफेंस की जरूरत
किसी को वहां थी नहीं
सबसे हम मिल चुके थे
लिख कर बातें कर चुके थे।

राकेश मिले, मिले धीरज
दिनेश मिले, मिले ....
जिनके नाम नहीं याद रहे
चेहरे भी कम याद रहते हैं
पर सब भावों में मन के
भीतर तक सदा बहते हैं।

अब मैं नहीं कह सकता
मैं लंदन नहीं कभी गया
कविता वाचक्‍नवी जी से
मेरा मिलना पु‍ष्टि करता है
लंदन जाने की मेरे या
लंदन के दिल्‍ली में छाने की
चित्र दिखलाऊंगा बाद में
एक और पोस्‍ट लगाऊंगा।

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लीगल नोटिस अविनाश वाचस्‍पतिजी को मिला है

>> शनिवार, २३ जनवरी २०१०




लो जी आनंद आ गया
एक लीगल नोटिस
मुझे भी आ गया।

भेजने वाले बहुत अच्‍छे हैं
भेजते हैं नोटिस लीगल
और अविनाश वाचस्‍पतिजी
वो भी अंग्रेजी में लिखते हैं।

मुझे तो ऐसा नोटिस
खूब फबता है
भेजने वाला भी जमता है
वो कहता है
मैंने उसे कुख्‍यात किया है
जबकि उसके कुकर्मों ने ही
उसे कुविख्‍यात किया है।

वकील है
कील तो ठोकेगा ही
पर कील को मुट्ठी
मारकर ठोंक रहा है
उन्‍हें रोको भाई
कहीं उनके हाथ में
चोट न लग जाये।

कील की नोक मेरी तरफ करो
नहीं तो मुट्ठी में घुस जाएगी
खून की धार बाहर आयेगी
यह तो उसकी त्‍वचा नहीं चाहेगी।

मैं मुलजिम हूं उनका तो
मुझे जी क्‍यों लिख रहे हैं
जब वे जी लिख रहे हैं
तो मैं तो उनका मुरीद हो गया हूं
बतलाइये एम आई पं‍ड्या जी
आपको मेरी कौन सी रचना
पसंद आ रही है
उस पर अपना नाम लिखिये
अपनी फोटो भी चिपकाइये
और खूब छापिये
जितने नोट मिलें उन्‍हें
ईमानदारी के साथ मेरे साथ बांटिये
उसमें से अपनी कुख्‍याति का खर्चा
पूरी बेदर्दी से काटिये।

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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग और कोहरे में जाम देखन मैं चल्‍या ... (अविनाश वाचस्‍पति)

>> बुधवार, २० जनवरी २०१०

वसंत पंचमी की शुभकामनायें
न तो कोहरा और न पहरा, दोस्‍तो कुछ भी हरा नहीं होता। बत्‍ती भी आजकल लाल ही मिलती है जिससे जाम का मजा मिलता है और जाम के इस मजे को जाम करने का कोई उपाय आज तक नहीं खोजा जा सकता है। जाम का यह मजा वाहनों के मामले में सबको पछाड़ चुका है। पर कोहरे ने तो क्‍या सड़क, क्‍या रेलें और क्‍या हवाई जहाज सबकी बत्‍ती लाल कर दी है। जाम के मजे की जमाखोरी में कोहरा भरपूर इजाफा करता है। यह जमाखोरी ही मजाखोरी को जन्‍म देती है। सिग्‍नल की लाल बत्‍ती को देखकर सड़क के वाहनों की बत्तियां लाल हो जाती हैं। कोहरा होते हुए भी सारा वातावरण लालिमामय हो जाता है। पर कोहरे का प्रभुत्‍व देखिए, नजर कुछ नहीं आता है। हाथ को हाथ सूझना भी आभासी प्रतिफल ही संभव होता है। लगता है इंटरनेट के बढ़ते फैलते वर्चस्‍व की आभासी दुनिया अधिक व्‍यापक होती जा रही है। कह सकते हैं ''जाम देखन मैं चल्या मैं भी हो गया जाम ...''। पीने जाम गया था पर जाम में उलझकर रह गया और उपर से कोहरा उसके गहरे पहरे से तो हरे कृष्‍ण भी निजात नहीं दिला पाते हैं। राम, शिव अथवा रावणों की क्‍या बिसात ? हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में यह कोहरा नहीं छाना चाहिए वैसे जब वातावरण कोहरामय हो जाता है तो सभी हिन्‍दी ब्‍लॉग भरपूर पोस्‍ट और टिप्‍पणीमय हो जाते हैं।

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हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग पर बाबाओं का कब्‍जा : बतलायें और अलबेला जी से एक समारोह में नकद ईनाम पायें (अविनाश वाचस्‍पति)

>> शुक्रवार, ८ जनवरी २०१०


नहीं जानते हैं तो जान जायें
नहीं तो हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग
जान से जायेगी
पता नहीं किस किसकी
जान पर आयेगी

कब्‍जा हो गया है
बाबाओं का
पता नहीं कौन से
हिमालय से
कंदराओं से
गुफाओं से
हुआ है इनका प्रादुर्भाव
अभी तक
हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में
रहा इनका नितांत अभाव।

एक भविष्‍य बतला रहे हैं
दूसरे पता नहीं क्‍या
तीसरे पता नहीं क्‍या क्‍या
जिनको पता हो
वे तुरंत इन ब्‍लॉगरों की पहचान बतलायें
और अलबेला खत्री जी से
बिना वोटिंग के
नकद 5-5 के ईनाम पायें
जो जल्‍दी से नेट पर
डुबकी लगायें और
ढूंढ लायें इनकी हकीकत

वैसे पहचानी जा रही है कलाकारी
इसमें अवश्‍य ही राजीव तनेजा ने है बाजी मारी
पहचान कौन से
आगे बढ़कर
अब उन्‍होंने
इसे धर्म बना लिया है
ब्‍लॉगरों को डरा
धमका रहे हैं
और खूब सारी
टिप्‍पणियां पा रहे हैं

इन सभी चित्रों का निर्माण राजीव तनेजा द्वारा किया गया ही संभावित है।

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