वसंत पंचमी की शुभकामनायें
न तो कोहरा और न पहरा, दोस्तो कुछ भी हरा नहीं होता। बत्ती भी आजकल लाल ही मिलती है जिससे जाम का मजा मिलता है और जाम के इस मजे को जाम करने का कोई उपाय आज तक नहीं खोजा जा सकता है। जाम का यह मजा वाहनों के मामले में सबको पछाड़ चुका है। पर कोहरे ने तो क्या सड़क, क्या रेलें और क्या हवाई जहाज सबकी बत्ती लाल कर दी है। जाम के मजे की जमाखोरी में कोहरा भरपूर इजाफा करता है। यह जमाखोरी ही मजाखोरी को जन्म देती है। सिग्नल की लाल बत्ती को देखकर सड़क के वाहनों की बत्तियां लाल हो जाती हैं। कोहरा होते हुए भी सारा वातावरण लालिमामय हो जाता है। पर कोहरे का प्रभुत्व देखिए, नजर कुछ नहीं आता है। हाथ को हाथ सूझना भी आभासी प्रतिफल ही संभव होता है। लगता है इंटरनेट के बढ़ते फैलते वर्चस्व की आभासी दुनिया अधिक व्यापक होती जा रही है। कह सकते हैं ''जाम देखन मैं चल्या मैं भी हो गया जाम ...''। पीने जाम गया था पर जाम में उलझकर रह गया और उपर से कोहरा उसके गहरे पहरे से तो हरे कृष्ण भी निजात नहीं दिला पाते हैं। राम, शिव अथवा रावणों की क्या बिसात ? हिन्दी ब्लॉगिंग में यह कोहरा नहीं छाना चाहिए वैसे जब वातावरण कोहरामय हो जाता है तो सभी हिन्दी ब्लॉग भरपूर पोस्ट और टिप्पणीमय हो जाते हैं।
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